रिश्तो में दूरियां-- पति- पत्नी


किसी भी रिश्ते और संबंधों को कायम करने के पीछे मानव का स्वार्थ,जरूरत,सम्मान, भूमिका, चाह,प्रेम आदि हो सकते है पर सफल रिश्ते के लिए या लंबे समय तक चलने वाले रिश्ते या संबंधों के लिए सम्मान और विश्वास ऐसे मुख्य दो आधार बहुत महत्वपूर्ण है, पर मेरे हिसाब से इनके अतिरिक्त सीमित दूरियां भी रिश्तों को सफल और कामयाब बनाने में अपनी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते है ।रिश्तों में दूरियां आवश्यक है पर एक सीमित मात्रा में।ऐसा मैं अपने अनुभव के आधार पर कह रहा हूं जोकि अपने समाज में अनुभव और अध्ययन किया है ,उसी के आधार पर अपना मत आप लोगो के सामने रख रहा हूं।हो सकता है ऐसा ना होता हो या आप इस मत से सहमत न हो ,पर इतना अवश्य कह सकता हूं की अगर आप मेरे पूरे संस्करण को पढ़ेंगे और समझेंगे तो जरूर मानेंगे मेरे विचार से।वैसे मैं अपने इस लेख में एक खास रिश्ता पर अपना मत दे रहा हूं जोकि हमारी भारतीय समाज की वंशावली प्रगति का आधार माना जाता है ,वो रिश्ता है पति पत्नी का।
आदमी जब इस मानव रहित समाज में जन्म लेता हैं तो उसका किसी से रिश्ता नही होता केवल एक मां ही है जिससे उसकी आत्मीयता का संबंध जुड़ा होता है।धीरे धीरे वह अपने विकास के साथ साथ कई तरीकों ,माध्यमों के जरिए नित नए रिश्ते ,संबंध कायम करता है।जिसमे से कुछ ऐसे रिश्ते या संबंध भी होते है जोकि शुरुआत से जिंदगी के आखिरी पड़ाव तक निभाए जाते है ,खुशी पूर्वक।आदमी अपने जिंदगी के शुरुआती दौर में जिन दोस्तो या रिश्तेदारों के निकट आता है तो उन्हें अपने जरूरत या उपयोगिता के अनुसार प्रयोग करता है,पर उनमें भी कुछ ऐसे संबंध होते है जिन्हे आत्मीयता से जोड़कर जिंदगी के अंत तक निभाता है।हम अपने जिंदगी में हजारों से लाखो लोगो से मिलते जुलते है उनमें से कुछ गिनती के ही संबंध या रिश्ते होते है जिन्हे हम अपने जिंदगी में महत्व देते है या अपनाते है।जिनके इर्द गिर्द ही हमारी जिंदगी घूमती रहती है और जो आपके समाज का महत्वपूर्ण अंग बन जाते है।उन्हें प्रभावित करने या अपनी पहचान स्थापित करने के लिए हम सम्पूर्ण जिंदगी में प्रयासरत रहते है।
हमने कई लोगों के द्वारा यह सुना होगा या अधिकतर लोगों से उनके जिंदगी के महत्वपूर्ण या करीबी लोगों के बारे में पूछे तो वो लोग क्यूं अपने दोस्तों का नाम का अवश्य जिक्र करते है? जहां तक मैं अपनी बात करूं तो मुझे स्वयं यही लगता है की दोस्त जीवन का सबसे रिश्ता या संबंध होता है।दोस्त या मित्र के बारे में मैं लिखना चाहूंगा फिर कभी क्योंकि यह भी कोई छोटा विषय नहीं है मेरे लिए बड़ा ही मार्मिक और करीबी है ये विषय ।
आदमी का जन्म से लेकर शादी और अंत तक इन सभी रिश्तों का बनना, टूटना लगा रहता है पर एक महत्वपूर्ण रिश्ता होता है पति पत्नी का, जोकि शादी के बाद अंत तक चलता है या कायम रहता है और वंशावली के विकास का मुख्य भाग माना जाता है ।इस रिश्ते का पालन चाहे सामाजिक बंधन, धार्मिक दबाव ,मानसिक दबाव ,पहचान या स्थायित्व जैसे कारणों के कारण होता हो या कुछ लोग ऐसा मानते हो ऐसा ,इस विषय पर न जाकर हम इस भारतीय परंपरा या संस्कृति के आधार पर इस रिश्ते पर अपना मत रखने का प्रयास किया है।
वर्तमान समय में हम क्या आप लोग भी देखते ही होंगे या अनुभव करते होंगे की पति पत्नी का रिश्तों का आयाम या स्वरूप बदलता जा रहा है।आज के समय में शादी होने के समय उपस्थित सभी लोगों के मन में  यह सवाल अवश्य गूंजता रहता है की क्या यह सफल जोड़ी या शादी साबित होगी या नहीं।आजकल हमने समझौते युक्त शादी का प्रचलन सुना  होगा ।जोकि हमारे समाज में भी होने लगा है।आधुनिक युग के विचारक या एकल मानवतावादी लोग इसके पक्ष में अपना मत अवश्य देते है और मानवीय मूल्यों के आजादी को आधार मानते है हमारी भारतीय संस्कृति ऐसी बिल्कुल नही थी,कभी नहीं।हमारी भारतीय संस्कृति में आदर्श का स्वरूप समाहित था, है और रहना भी चाहिए।
भारतीय समाज या भारतीय संस्कृति हमेशा एक कुशल और सभ्य समाज की कल्पना ही नहीं करता बल्कि उसे कायम करने करने के लिए समाज की अपनी परंपरा, नियम,आदर्श और वसूल है पति पत्नी के संबंध के बारे में कहे तो मैने अध्ययन और अनुभव किया है की व्यक्ति के सभी रिश्तों में सामंजस्य कायम करने के लिए दूरियां सीमित क्रम में आवश्यक है ये बात इस रिश्ते पर लागू होती है।उदाहरण के लिए एक समय ऐसा था हमारे भारतीय समाज का जब इन दूरियों को कायम करने और सामंजस्य बनाए रखने के लिए कुछ पारंपरिक रीति रिवाज या नियम कायम थे और कुछ उपयोगितावश गतिविधियां स्वयं हुआ करती थी जिससे पति पत्नी में सीमित दायरा बना रहता था और उनमें प्रेम की भावना का निरंतर बड़ोत्तरी होती जाती थी।जैसे हमारे समाज में शादी के उपरांत कुछ दिनों के भीतर ही पत्नी का अपने 
मां बाप के घर समय बिताना, विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक त्योहारों पर पुनः पत्नी का अपने मां बाप के घर समय बिताना आदि ,सरल भाषा में कहें तो समाज ऐसे अवसर उत्पन्न या कायम थे जिससे कुछ समय अंतराल पत्नी का अपने जन्मस्थान या घर पर समय बिताना होता था। एक अन्य स्थिति भी थी कुछ परिवार में शादी के उपरांत आर्थिक कारणों से कमाने के उद्देश्य से अन्य स्थलों के लिए पलायन सीमित समय के लिए होता था, जिससे पत्नी परिवार में रहकर या अकेले परिवार अगुवाई करती है ,ख्याल रखती है।इन दोनो परिस्थिति में दोनो पति और पत्नी के बौद्धिक,व्यवहारिक, सामाजिक ,प्रबंधन क्षमता में निखार आता है और दोनों एक दूसरे से संबंधित सभी पहलुओं की विवेचना या तुलनात्मक अनुभव प्राप्त करते है।वैसे
इन दोनो अवसरों या स्थितियों के बाद एक समय ऐसा आता है जब दोनो में स्थिरता आ जाति है और दोनों समाज के अन्य संबंधों को सीमित कर अपने आप को और अपने भविष्य को संवारने का प्रयास करते है।भविष्य से तात्पर्य अपने बच्चो और परिवार से है। 
इसलिए उस जमाने के पति पत्नी के रिश्तों की महत्ता और आखरी समय तक साथ निभाने की व्यवस्था कायम और सफल थी ।इसका आप एक सरल उदाहरण से समझ सकते है जैसे किसी पत्नी का पति उसकी शादी के एक साल बाद बाहर अन्य शहर चला जाता है कमाने के लिए और वह 4 से 5 महीने के बाद आता है और 10 15 दिन पत्नी ,परिवार के साथ गुजार कर पुनः चला जाता है ,इसी क्रम में कई साल बिताता है और एक समय ऐसा आता है चाहे उम्र ,क्षमता के अनुसार अपने परिवार, पत्नी के पास आकर रहता है और पूरी जिदंगी साथ में व्यतीत करता है या वह अपनी पत्नी को अपने कार्यक्षेत्र शहर में ले जाकर अपनी जिंदगी जीता है।इन सभी स्थितियों में पति पत्नी में आत्मविश्वास, निडरता, प्रबंधन आदि गुणों का विकास होता है ,यहां तक की समाज के अन्य पहलुओं और पक्षों का परिचय भी होता है।
वर्तमान समय में बात करे तो इस आधुनिकता के युग में इस रिश्ते में काफी बदलाव आया है ,जिसे हम लोग महसूस कर रह होंगे शायद ।जोकि  सकारात्मक  से अधिक नकारात्मक है दृष्टिकोण है हमारे समाज के लिए।इसका सबसे अधिक और बड़ा कारण हमारा पश्चिमी सभ्यता या संस्कृति के निकटता है।मेरे हिसाब कुछ उपाय या कार्य है जिन्हे हम अपनाकर इस आदर्श रिश्ते को पुनः जागृत और स्थायित्व प्रदान कर सकते हैं।

 आजकल के पति पत्नी के रिश्तों में भी दूरियां एक सीमित मात्रा में आवश्यक है,क्योंकि उसी दौर में आप अवलोकन या तुलनात्मक अध्ययन कर सकते है एक दूसरे और अपने आप के व्यवहारों को।दूरियां का अर्थ नही है की अलग अलग स्थान पर जाकर रहे।आपस में दोनो के बीच ऐसे कई मुद्दे , समस्याएं आती है जिन पर एकमत नहीं होता , उस परिस्थिति में एक दूसरे को समय देना बहुत जरूरी है।दोनो पक्षों को समय निकालकर अपने दोस्तों,रिश्तेदारों ,संबंधियों या अन्य जगहों पर समय बिताना चाहिए ।सबसे जरूरी आज के युग में एकल भाव को खत्म करना ,एक दूसरे के विचारों को सुनना और निर्णय लेना।आप अकेले ही परिवार, समाज ,राज्य ,देश का निर्माण नहीं कर सकते है इसलिए आपके जिंदगी से जुड़े सभी संबंध जोकि नजदीक है उनका तो खासतौर पर आपकी कामयाबी या विकास में महत्व रहता है क्योंकि इन्ही के बीच रहकर ही आप अपने जिंदगी की सभी अनुभवों को सीखते और अपनाते है ।किसी भी रिश्ते में स्वयं को केंद्र में रखकर परिस्थिति को समझना काफी हद तक गलत ही होता है।क्रिया की प्रतिक्रिया में बदलने में क्रिया का महत्वपूर्ण योगदान होता है ।

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