बातों बातों में
हम पे जो गुजरी है कुछ नया नहीं है ये सब
यारों हम सबकी कहानी एक जैसी ही है तो
गर हो अधिक मायूस ,खफा जिंदगी से तुम
कभी तन्हाई में खुद से बात करके देखा जाय
ना जाने कितनों से आगे और पीछे दिखेंगे हम
फिर फिक्र की आग में आज को क्यों जलाया जाए
छोड़ो सबकुछ इस पल को दिल से निभाया जाय
दुनिया को समझाने से पहलेखुद को समझा जाए
सूरज केंद्र में ही आता है किनारा हमको ही भाता है
अपने आपको दरकिनार ही क्यों किया जाए फिर
इंसान है हम फिर इंसान ही रहने दिया जाए हमे
रखते है आसमान छूने की हसरत हम भी पर
अपने परों से औरों को कैसे साथ उड़ाया ही जाए
इसलिए खुला आसमान दूर से अच्छे लगते है माना हम धरा के इस मेले में कच्चे नजर आते है
पर इतना जरूर है की इंसानों में सच्चे नजर आते है
अभी अभी बीती है हमारी जवानी तो क्या हुआ
अभी कई और मुकाम बनाने बाकी है यहां
ये मुकाम मेरे किसी काम आयेंगे फिर क्या
छोड़ो यार ये भविष्य में पहचान दिलाएंगे क्या
इस जद्दोजहद की वेदना में पड़ना ही क्यूं है
जीते है ऐसी जिंदगी चाहे सबकुछ खोना हो तो क्या
औरों के चेहरे पर लाती हो मुस्कान जिस तरह
इस मुस्कान के ठहराव के लिए कुछ किया ही जाए
बस जीए और दूसरों को खुशहाल जीने दिया जाय
खेल जीवन का दूसरों के साथ खेलना नही हमे
खिलाड़ी अपने लिए और दर्शक दुनिया के लिए बना जाए
होगी इसमें भी रुसवाई इस जहां में फिर भी
इसलिए छोड़ो अब लिखना ही क्यों न बंद किया जाए।।
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